संदेश

प्रश्न.८०: प्रिय गुरुदेव, क्या यह ठीक है यदि मैं आपको अपने गुरु के रूप में आत्मसमर्पण कर दूं लेकिन साथ ही कृष्ण, जीसस या अल्लाह से प्रार्थना करूं? क्या यह एक ही समय में दो कुर्सियों पर बैठने जैसा नहीं है?